अप्रैल का महीना मेरे लिए खुशियों की सौगात है लाया,
चाहता था जिसे मैं उसे अपने साथ ले आया.
याद करूँ अगर दो साल पहले की बातों को,
तो यही वो अप्रैल था जिसने मुझसे मेरे प्यार को छीना था,
पर ये अप्रैल में तो मेरे सबसे प्यारे दोस्त को वापिस ले आया.
दुआ है खुदा से कभी ये दिन खत्म न हो,
रहे बनके वो हमेशा मेरा दोस्त, और जिंदगी हर पल उसके संग हो.
जानता हूँ शायद ही ये सच हो पाएगा
पर कहते हैं ना, कि जब तक हार ना जाओ हार ना मानो,
उसी तरह शायद मैं उसे भी अपनी जिंदगी में वापिस ला पाऊंगा.
धन्यवाद् हो माँ अम्बे का, जो उसके दिन मैं उससे बात कर पाया,
नहीं भूलूंगा उस माँ के आशीर्वाद को कभी,
क्यूंकि उसके आशीर्वाद से ही आज काफी दिनों बाद मेरे जिंदगी में ये हसीं दिन लौट के है आया......