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Regards,
NNaresh Garg

Sunday, January 9, 2011

9 & 13 January........

आओ दोस्तों तुम्हे इस दिन के बारे में बताऊं,
क्या ख़ास है इस दिन में ये राज़ मैं तुम्हे सुनाऊं,
आज कि दुनिया में प्यार बिन देखे करने वालों को पागल कहा जाता है,
शायद मेरा भी नाम उन पागलों में गिना जाता है,
इस दिन मैं किसी अनदेखे चेहरे से प्यार करने कि कसमें खा बैठा था,
कभी ना जाऊँगा उसे छोड़ कर ये वादा उसे दे बैठा था.
जब देखा मैंने उसे बाद में तो दिल में तसल्ली थी आई,
मेरी किस्मत उतनी बुरी नहीं, जितनी खुदा ने मुझे थी दिखलाई.
इस दिन मैंने वादा किया था कि कभी तुझसे झूठ ना बोलूँगा,
मर जाऊँगा जीते जी, अगर तुझसे रिश्ता तोडूंगा,
ख़ुशी मिलती है मुझे, जब सोचता हूँ कि मैं आज भी अपना वादा निभा रहा हूँ,
अब तो यही मेरी किस्मत है शायद जिसे मैं जीए जा रहा हूँ..जिसे मैं जिए जा रहा हूँ.............

7 January.............

7 जनवरी, ये दिन लौट के फिर वापिस है आया,
पर जो दिया था इसने मुझे ३ साल पहले, उसे इस बार अपने साथ ना लाया,
अकेले ही मना ली इस दिन कि ख़ुशी मैंने इस बार,
शायद अब तो यही करना होगा मुझे हर बार.
दुआ है मेरी उसकी जिंदगी से ये दिन खत्म हो जाए,
ख़ुशी तो मुझे मिलती है, उसको दुःख देने वाला हर पल इस दुनिया से दफ़न हो जाए.
नहीं चाहता मैं कि उसे कभी इस दिन कि याद आये,
याद आये उसे पुरानी बातें, और उसकी आखों में कभी भी आँसूं आयें.
हे खुदा! अगर कभी ऐसा भी हो,
तो ये दुआ है मेरी, कि ऐसा होने से पहले मेरा जीवन खत्म हो!!!!!!!!!!!!