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Regards,
NNaresh Garg

Friday, July 30, 2010

Some small one, Which Touches My Heart

१) आज फिर दिल चाहा, तुझसे मिलने आ जाऊं,
     आज फिर मन बोला, तेरी बाहों में खो जाऊं,
     सोचता हूँ जब भी अपने बारे में, तेरे सिवा कुछ और याद नहीं आता,
     मेरे दोस्त! तू ही बता, कैसे मैं तुझे भूल जाऊं.

२) तेरी यादों से बाहर आना मुश्किल लगता है,
    तेरे बिन जी पाना मुश्किल लगता है,
    दिल करता है, तुम रहो हरवक्त मेरे पास,
    इस ख्याल में भी जीना अच्छा लगता है.

३) हर पल सोचता हूँ तेरे बारे में,
    जाने कब तुम्हे भूल पाऊंगा,
    कभी मिल भी पाओगी तुम मुझे,
    या बिन मिले ही मर जाऊँगा.

४) काश की वो वक़्त वापिस आ जाए,
    लबों पे उसके, मेरा नाम आ जाए,
    मैं हँसते हँसते मरना कबूल कर लूं,
    अगर मेरे जनाज़े पे मेरा यार आ जाए.

५) हर वक़्त वो मेरे पास रहती है,
    मेरी यादों में सदा आबाद रहती है,
    वो तो हम हैं, जो बर्बाद हुए हैं किसी के प्यार में,
    वरना वो तो आज भी हर गम से आजाद रहती है.

Wednesday, July 7, 2010

Jindagi

खुद ही खुद से अक्सर भागा करता हूँ मैं,
रातों को भी अक्सर जागा करता हूँ मैं,
तन्हाई में बनती है तन्हाई ही मेरी साथी,
तन्हाई में भी एक साए से दिल लगाया करता हूँ मैं.
खुदा ने तो दी है अपनी खुदाई की सौगात,
सोच के खुदा की मर्ज़ी, खुद को बहलाया करता हूँ मैं,
कैसी होगी आने वाली हर रात, ना मालोम मुझे,
कर दिन एक जिंदगी की तरह बिताया करता हूँ मैं.

Haath se Jana Dil Ka

उनका वो अंदाज़-ऐ-करम, उनपे वो आना दिल का,
हाय वो वक़्त, वो बातें, वो ज़माना दिल का.
न सुना उसने तवज्जो से फ़साना दिल का,
उम्र गुजरी है मगर दर्द ना जाना दिल का,
दिल्लगी दिल लगी बनके मिलता देती है,
रोग दुश्मन को भी, यार अब ना लगाना दिल का,
वो भी अपने ना हुए, दिल भी गया हाथों से,
ऐसे आने से तो बेहतर था, ना आना दिल का.
उनकी महफ़िल में "नरेश", उनके तबस्सुम की कसम,
देखते रह गए हम, हाथों से जाना दिल का.

Meri Yaad Me Kuch Gungunaya Karogi

मेरी याद आएगी तो रोया करोगी,
आंसुओं से दामन भिगोया करोगी,
तन्हाई में पढ़ पढ़कर ख़त मेरे पुराने,
कभी चुमोगी, कभी सीने से लगाया करोगी.
सुनकर मेरी आहट सड़क पर
रात को भी बिस्तर पर बैठ जाया करोगी.
आईने में देखकर आँसूं अपने,
मेरी याद में कुछ गुनगुनाया करोगी.

Tuesday, July 6, 2010

Duaayein

चाँद कि तरह चमकते रहो, फूलों कि तरह महकते रहो,
खिलती कलियों कि मुस्कराहट, तुम्हारे हो करीब,
रात के अँधेरे में हर जवाँ रौशनी तुम्हे हो नसीब.
सुबह के उजालों में तुम्हारा हर दिन खिल उठे,
काँटों कि राहों पे चलना तुम्हे ना पड़े.
फूलों कि सेज का दामन तुमसे कभी ना छूटे
 अश्कों का नज़ारा तुम्हे कभी ना मिले,
होठों पर हर समय ख़ुशी के हो फूल खिले.
तुम्हारी साँसों का हर दुःख हमे हो नसीब,
बस हर नई बहार तुम्हारे हो करीब.
बस अब तो यही दुआ है हमारी,
कि मेरे जैसे बेगैरत दोस्त तुम्हे और ना मिलें.
कोयल गाती रहे ये गीत,
              "खिलता हुआ फूल खुशबू दे आपको,
                उगता हुआ सूरज रौशनी दे आपको,
                हम तो कुछ देने के काबिल नहीं,
                 देने वाला हर ख़ुशी दे आपको!"

Alfaaz

रिश्ते वफ़ा के बेवफाई में तब्दील हो गए,
वफ़ा करके भी हम नजरों में उनकी जलील हो गए,
लिपटे रहते थे जो हाथ सीने से हरदम, वो हाथ ही आज क़ज़ा के सबील हो गए,

लफ्ज़ थे जो खुदा से फ़रियाद मिलने कि,
अलफ़ाज़ वो ही रुसवाई के दलील हो गए....

Insaan bana rehta hoon

देख के उसको नादान बना रहता हूँ,
सभी कुछ जान के अनजान बना रहता हूँ.
वो सितम गर देता है काश हर पल,
सामने उसके वीरान बना रहता हूँ.
तमाम गम अपने अंदर समेटे बैठा हूँ,
फिर भी एक खामोश सा तूफ़ान बना रहता हूँ,
मैंने एक उम्र गुजारी है मुश्किल में,
सामने उसके आसान बना रहता हूँ.
मेरे वजूद से रूठी है जिंदगी ऐसे,
अब तो बेजान सा इंसान बना रहता हूँ.

Unke Siva kisi aur ko Hamsafar Banaya na gaya

रूठा इस तरह कि मनाया ना गया,
दूर हो गया इतना कि पास बुलाया ना गया,
दर्द तो बहुत था, मगर गैरत ने संभाले रखा,
दर्दे दिल का हाल सरे महफ़िल सुनाया ना गया.
जाने क्या राज़ है उसकी याद आती नहीं,
मगर यह भी सच है कि वह भुलाया ना गया.
दिल तो दिल है समुंदर का साहिल नहीं,
लिख दिया उसका नाम, फिर मिटाया ना गया.
उसी के नाम पर तबाह हो गए हम यारों,
अपना कहकर भी जिसे अपना बनाया ना गया.
सफ़र तन्हा कर लिया जिंदगी का,
पर उसके सिवा किसी और को अपना बनाया ना गया.

Sisters

मेहमान होती हैं, कुछ देर के लिए आई होती हैं,
अपनी होते हुए भी वो पराई होती हैं.
भुलाए नहीं भूलती वो बचपन कि हसीन यादें,
जो उसने हमारे संग बिताई होती हैं.
लाख झगडे हो हमारे बीच,
फिर भी वो सब अच्छी लगती है.
क्यूँकि ये चीज़ ही भगवान् ने ऐसी बनाई होती है.
डोली में बैठकर जब वो घर से विदा होती है,
तो हर दिल में मायूसी छाई होती है
ससुराल में जाकर भी वो, मायके को नहीं भूल पाती.
हर सुख दुःख में है वो संग रहती, जिस तरह अपनी परछाई होती है
भगवान् करे वो घर हमेशा सलामत रहे,
 जिसमे नसीब अपना वो लिखवाये होती हैं.
वो लोग किस्मत वाले होते हैं, जिनकी बहनें होती हैं.

Monday, July 5, 2010

Pathar ko bhi Mom Kar diya

तेरी यादों ने जीना मुहाल कर दिया,
तेरी आने कि उम्मीदों ने जीना आसान कर दिया.
जब लगा कि तू नहीं आने वाली,
तो उस पल ने मेरा मरना आसान कर दिया.

याद आने लगा हर लम्हा, जो बिताया था तेरे संग,
याद आने लगा हर सपना जो देखा था तेरे संग,
तेरे साथ होने का एहसास मेरी जिंदगी को ख़ुशी से भर गया.
तेरे साथ देखा हर सपना, मेरे जीने कि वजह बन गया.

कभी तू होंठों कि हंसी बनकर याद आती है,
तो कभी आँखों कि नमी भी तेरी याद दिलाती है,
ए मेरी जिंदगी तू ही बता दे मुझे,
तू मुझे इतना क्यूँ तडपाती है,

इंतज़ार है मुझे उस दिन का,
जब तू मेरे पास लौट आएगी,
और मेरे पास आकर तू कहेगी, कि "नरेश" तेरे प्यार ने तो पत्थर को भी मोम कर दिया.