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NNaresh Garg

Wednesday, June 9, 2010

Suhana Mausam

आज कितना सुहाना मौसम आ गया,
मुझे पुराने दिनों की याद दिला गया.
याद आ गया हाथों में हाथ डाले घूमना,
वो बारिश की बूंदों में एक दुसरे संग झूमना,
याद आ रहा है वो पल, जब हम बारिश में भीग जाते थे,
और दुनिया से बेखबर एक दुसरे में खो जाते थे.
आज का मौसम उन पलों को याद करा गया,
आज का मौसम उस सुहाने सफ़र को फिर याद करा गया.
आज याद आ रहा है मुझे तेरे बालों के साए में सर रख कर सोना,
आज याद आ रहा है मुझे तेरी आँखों में आँखें डाल कर मुस्कुराना.
आज फिर ये मौसम तेरे साए की याद दिला गया,
आज ये मौसम, फिर मेरी खामोश आँखों में बरसात करा गया.

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