7 जनवरी, ये दिन लौट के फिर वापिस है आया,
पर जो दिया था इसने मुझे ३ साल पहले, उसे इस बार अपने साथ ना लाया,
अकेले ही मना ली इस दिन कि ख़ुशी मैंने इस बार,
शायद अब तो यही करना होगा मुझे हर बार.
दुआ है मेरी उसकी जिंदगी से ये दिन खत्म हो जाए,
ख़ुशी तो मुझे मिलती है, उसको दुःख देने वाला हर पल इस दुनिया से दफ़न हो जाए.
नहीं चाहता मैं कि उसे कभी इस दिन कि याद आये,
याद आये उसे पुरानी बातें, और उसकी आखों में कभी भी आँसूं आयें.
हे खुदा! अगर कभी ऐसा भी हो,
तो ये दुआ है मेरी, कि ऐसा होने से पहले मेरा जीवन खत्म हो!!!!!!!!!!!!
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