आज का सपना, कितना प्यारा था
काफी दिनों बाद उसने मुझे प्यार से पुकारा था.
दर्द था उसकी आवाज़ में, नमी थी आखों में,
और खोये हुए थे हम दोनों, एक दूजे की आखों में.
आखों की नमी हमारी हालात ब्यान कर रही थी,
कैसे जिए है एक दूजे के बिन, ये सरे-आम बता रही थी.
दुआ करता हूँ ये सपना कभी सच ना हो,
एक पल के लिए भी उसकी आखें नम ना हों,
अगर वो मिले मुझसे तो उसे भी ख़ुशी हो,
वर्ना उससे मिले बिना ही मेरी जिंदगी खत्म हो जाए.
No comments:
Post a Comment