आज एक वर्ष बाद, फिर लौट के वो दिन है आया,
पर वो जिसका इंतज़ार था मुझे, उसे अपने साथ ना लाया.
आखिरी बार उसने मुझसे प्यार से बात की थी,
मैं क्यूँ उसे सताता हूँ, ये शिकायत की थी.
ये उसकी मुझसे पहली और आखिरी शिकायत थी,
उसके बाद तो उसने मुझसे बात तक ना की थी.
आज तक याद है मुझे उसकी हर बातें,
भुलाए नहीं भूलती वो हसीं यादें,
दिल करता है भाग कर उसके पास चला जाऊं,
फिर ना सताऊंगा उसे, ये वादा कर आऊं.
पर क्या करूँ, डर लगता है, कहीं वो और ज्यादा नाराज़ ना हो जाए,
और जो एक उम्मीद है उससे बात होने की, वो भी खत्म ना हो जाए.
इसलिए चुपचाप बैठा हूँ, आज भी उसके इंतज़ार में,
कि कब वो अपना वादा याद करे और मुझसे बात करे.
उम्मीद करता हूँ ये वक़्त भी जल्द ही आएगा,
और फिर से वो मेरा सबसे प्यारा दोस्त बन जाएगा.......
No comments:
Post a Comment