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NNaresh Garg

Friday, December 31, 2010

A Year Without Talk

Today at the End of 2010, I think the year has gone with out any talk with My Friend,
Then I Feel, Its Just My Thinking that I havent talked to Her
The Reality is that when my friend resides in me, Then How it is possible a single moment has passed without her..

I am Sorry My HeartBeat, I Felt My Life is far from Me..

This is only for you,

"आज २०१० की आखिरी रात है,
या २०११ की शुरुआत है,
इसको कैसे भी सोचो,
पर दोनों एक ही बात है,
तुम आज भी मेरे उतने करीब हो, जितना पहले थी,
तुम आज भी मेरे दिल में रहती हो, पहले की तरह,
अब तो वो दिन भी आने वाला है जो तुम्हे मेरे पास लाया था,
और वो दिन भी आने वाला है जो हमेशा के लिए तुम्हे मुझसे दूर ले जाएगा,
पर सोचता हूँ क्या सच में भी ऐसा होगा की मैं तुम्हे कभी भूल पाऊँगा?
नए साल में सोचता हूँ कुछ नई शुरुआत करूँ,
पर जब कुछ खत्म होगा तभी तो नई शुरुआत हो.
आज भी ऐसा लगता है जैसे कल ही की बात है,
जब मैंने तुमसे बात की थी,
वो बात पहली बार की थी, पर तुमसे आखिरी मुलाकात को ज़माना बीत गया,
फिर ऐसा क्यूँ लगता है?
काश तुम मुझे ये समझा पाती, कि तुम्हारे बिना मुझे जीना कैसे है,
तो आज इस दिन को मैं २०१० का आखिरी दिन ना सोच के २०११ का पहला दिन सोच पाता.
एक आखिरी इलत्ज़ा है तुझसे मेरी,
कि तुम वापिस आके जिंदगी में मुझे अकेले जीना सिखा जाओ,
जिंदगी जियूँ मैं हंसी ख़ुशी, ये दुआ मेरे लिए कर जाओ,
तेरी यादों के सहारे ही जी लूं मैं, इतनी ताकत मुझको दे जाओ,
और फिर ना करूँ कभी तुझे परेशान मैं, ये वादा मुझसे ले जाओ,
ये वादा मुझसे ले जाओ.

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