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NNaresh Garg

Friday, May 21, 2010

मन करता है.

आज फिर तेरे पास आने को मन करता है,
आज फिर तुझे अपना बनाने को मन करता है.
 काश तू आज फिर से मेरे पास आ जाए,
 काश तू आज फिर से मेरी बाहों में समा जाए.
आज फिर तेरे संग संग चलने को मन करता है,
आज फिर तुझे बाहों में भरने को मन करता है.
ऐ खुदा! आज फिर उसे मेरा बना दे,
ऐ खुदा! आज फिर मुझसे उससे मिला दे.
बस दे दे मुझे इतनी ख़ुशी,
तो पूरी हो जाये मेरी सारी मुराद  मांगी हुई.
आज मैं फिर उसका हो जाऊं,
आज फिर वो मेरी हो जाए.
अगर आज ऐसा हो जाए,
तो ऐसा लगे जैसे मरते हुए इन्सान को जीवनदान मिल जाए.
आज फिर मेरा उससे मिलने को मन करता है,
आज फिर मेरा उसके संग खुशियाँ बांटने का मन करता है.
काश आज फिर मैं उसको याद आ जाऊं,
काश आज फिर वो मेरे सपनो में खो जाए.
आज फिर उसके सपनो में खोने को मन करता है,
आज फिर उसके साए में रहने को मन करता है.
काश वो बीता हुआ वक़्त फिर से वापिस आ जाए,
काश फिर से हम दोनों एक हो जाएँ.
आज फिर से उसके संग जीने को मन करता है,
आज फिर से उसके बिना मरने को मन करता है.

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