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NNaresh Garg

Wednesday, April 28, 2010

एक दुसरे की बाहों में खो जाएँ

बैठे - बैठे आज फिर तू याद आ गयी, बैठे-बैठे आज फिर तू आखों को रुला गयी।
याद आ गया आज वो साथ बिताया हर लम्हा, याद आ गया वो सदा साथ रहने का सपना,
कितना अच्छा होता अगर हो जाता हमारा सपना हकीकत, सदा साथ रहते और करते एक दूजे से शरारत।
तेरी प्यार भरी बातों ने आज फिर दिल महका दिया,
तेरी जुदाई ने आज फिर मुझे देवदास बना दिया।
काश वो लम्हा वो पल, फिर से वापिस आ जाए,
और हम दोनों हमेशा के लिए एक दुसरे की बाहों में खो जाएँ।

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