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Regards,
NNaresh Garg

Tuesday, July 6, 2010

Alfaaz

रिश्ते वफ़ा के बेवफाई में तब्दील हो गए,
वफ़ा करके भी हम नजरों में उनकी जलील हो गए,
लिपटे रहते थे जो हाथ सीने से हरदम, वो हाथ ही आज क़ज़ा के सबील हो गए,

लफ्ज़ थे जो खुदा से फ़रियाद मिलने कि,
अलफ़ाज़ वो ही रुसवाई के दलील हो गए....

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