खुद ही खुद से अक्सर भागा करता हूँ मैं,
रातों को भी अक्सर जागा करता हूँ मैं,
तन्हाई में बनती है तन्हाई ही मेरी साथी,
तन्हाई में भी एक साए से दिल लगाया करता हूँ मैं.
खुदा ने तो दी है अपनी खुदाई की सौगात,
सोच के खुदा की मर्ज़ी, खुद को बहलाया करता हूँ मैं,
कैसी होगी आने वाली हर रात, ना मालोम मुझे,
कर दिन एक जिंदगी की तरह बिताया करता हूँ मैं.
No comments:
Post a Comment