चाँद कि तरह चमकते रहो, फूलों कि तरह महकते रहो,
खिलती कलियों कि मुस्कराहट, तुम्हारे हो करीब,
रात के अँधेरे में हर जवाँ रौशनी तुम्हे हो नसीब.
सुबह के उजालों में तुम्हारा हर दिन खिल उठे,
काँटों कि राहों पे चलना तुम्हे ना पड़े.
फूलों कि सेज का दामन तुमसे कभी ना छूटे
अश्कों का नज़ारा तुम्हे कभी ना मिले,
होठों पर हर समय ख़ुशी के हो फूल खिले.
तुम्हारी साँसों का हर दुःख हमे हो नसीब,
बस हर नई बहार तुम्हारे हो करीब.
बस अब तो यही दुआ है हमारी,
कि मेरे जैसे बेगैरत दोस्त तुम्हे और ना मिलें.
कोयल गाती रहे ये गीत,
"खिलता हुआ फूल खुशबू दे आपको,
उगता हुआ सूरज रौशनी दे आपको,
हम तो कुछ देने के काबिल नहीं,
देने वाला हर ख़ुशी दे आपको!"
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