देख के उसको नादान बना रहता हूँ,
सभी कुछ जान के अनजान बना रहता हूँ.
वो सितम गर देता है काश हर पल,
सामने उसके वीरान बना रहता हूँ.
तमाम गम अपने अंदर समेटे बैठा हूँ,
फिर भी एक खामोश सा तूफ़ान बना रहता हूँ,
मैंने एक उम्र गुजारी है मुश्किल में,
सामने उसके आसान बना रहता हूँ.
मेरे वजूद से रूठी है जिंदगी ऐसे,
अब तो बेजान सा इंसान बना रहता हूँ.
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