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NNaresh Garg

Tuesday, July 6, 2010

Unke Siva kisi aur ko Hamsafar Banaya na gaya

रूठा इस तरह कि मनाया ना गया,
दूर हो गया इतना कि पास बुलाया ना गया,
दर्द तो बहुत था, मगर गैरत ने संभाले रखा,
दर्दे दिल का हाल सरे महफ़िल सुनाया ना गया.
जाने क्या राज़ है उसकी याद आती नहीं,
मगर यह भी सच है कि वह भुलाया ना गया.
दिल तो दिल है समुंदर का साहिल नहीं,
लिख दिया उसका नाम, फिर मिटाया ना गया.
उसी के नाम पर तबाह हो गए हम यारों,
अपना कहकर भी जिसे अपना बनाया ना गया.
सफ़र तन्हा कर लिया जिंदगी का,
पर उसके सिवा किसी और को अपना बनाया ना गया.

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